आधुनिक और रहने योग्य शहरों में, विश्वसनीय जल और स्वच्छता सेवाएँ 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हाल के वर्षों में, सरकारी कार्यक्रमों और शहर-स्तरीय सुधारों ने उल्लेखनीय प्रगति की है—नेटवर्क का विस्तार हुआ है, उपचार क्षमता (treatment capacity) में सुधार हुआ है और यह साबित हुआ है कि उच्च गुणवत्ता वाली, ग्राहक-केंद्रित सेवाएँ प्राप्त करना संभव है। अब कई शहरों में 24 घंटे पानी की सप्लाई मिल रही है। पानी की बर्बादी और लीकेज में भी काफी कमी आई है। इसके अलावा, कई शहरों ने गंदे पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल करने और कचरे के निस्तारण (वेस्ट मैनेजमेंट) में भी शानदार कामयाबी हासिल की है।
जैसे-जैसे शहरी आबादी बढ़ती है और शहर इन उपलब्धियों को बड़े पैमाने पर लागू करते हैं, एक प्रमुख चुनौती बनी रहती है: असमान और अक्सर अविश्वसनीय सेवा वितरण। बुनियादी ढांचे का विस्तार तो हुआ है, लेकिन सेवा की गुणवत्ता में व्यापक भिन्नता है—उदाहरण के लिए, कई घरों में दिन में केवल कुछ घंटों के लिए ही पानी आता है। भारत के शहरी परिवर्तन के अगले चरण में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि जो भी निर्माण हो, वह लोगों की जरूरतों को लगातार पूरा करे।
यह विश्व बैंक समूह और एशियाई विकास बैंक की एक नई संयुक्त रिपोर्ट का मुख्य विषय है, जिसका शीर्षक है “भारतीय शहरों में जल और स्वच्छता: मजबूत और निवेश-योग्य (Bankable) जल आपूर्ति, स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए ज्ञान ढांचा” और इस रिपोर्ट का शुभारंभ 8 नवंबर, 2025 को भारत के राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन में किया गया था। यह रूपरेखा पूरी चर्चा की दिशा बदल देती है—अब सवाल यह नहीं है कि 'शहरों ने क्या-क्या बना दिया है?', बल्कि सवाल यह है कि 'ये सिस्टम लोगों के लिए कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं?' रिपोर्ट एक सीधी लेकिन महत्वपूर्ण बात कहती है: केवल हार्डवेयर - पाइप, उपचार संयंत्र, पंपिंग स्टेशन - तेजी से बढ़ते शहरों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और ग्राहक-उन्मुख सेवाएं प्रदान नहीं कर सकते हैं।
परिवर्तन कैसा दिखता है ?
सफल शहरों के अनुभव से पता चलता है कि पेशेवर संस्थानों और अनुकूल वातावरण के साथ, ग्राहक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करना संभव है और ये परिवर्तनकारी भी हो सकती हैं। रिपोर्ट शहरों से आग्रह करती है कि वे अधिक निर्माण करने के बजाय बेहतर सेवाएं प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करें, यह सुनिश्चित करते हुए कि प्रत्येक निवेश से लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार हो।
इस परिवर्तन का एक अहम हिस्सा वित्तीय स्थिरता है। कई शहरों में राजस्व बुनियादी परिचालन लागतों को पूरा करने के लिए भी बहुत कम है, जिससे सेवा प्रदाताओं की प्रणालियों के रखरखाव या उन्नयन में निवेश करने की क्षमता सीमित हो जाती है। इसका परिणाम "निर्माण, उपेक्षा, पुनर्निर्माण" का एक चक्र है, जिसमें सार्वजनिक बजट लागत वहन करता है जबकि सेवा की गुणवत्ता वही रहती है।
रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि अच्छी गुणवत्ता वाली सेवाएं प्रदान करने की वास्तविक लागत को पूरा करने के लिए राजस्व को अनुकूलित करना - कम आय वाले परिवारों के लिए लक्षित सहायता प्रदान करना - इस चक्र को तोड़ने, में मदद कर सकता है। यह बेहतर प्रदर्शन और दक्षता को प्रोत्साहित करने और उपयोगिताओं को वित्तपोषण स्रोतों की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंच बनाने में सक्षम बना सकता है।
इसका एक अन्य महत्वपूर्ण स्तंभ निजी क्षेत्र की भूमिका है। निवेश योग्य परियोजनाएं—जिनमें राजस्व का स्पष्ट प्रवाह, पारदर्शी लेखांकन और प्रदर्शन के लिए मजबूत प्रोत्साहन हों—ऐसी नई साझेदारियों के द्वार खोल सकती हैं जो निवेश को आकर्षित करती हैं। इससे सफल कार्यों को बड़े पैमाने पर विस्तार देने, नवाचार करने और अधिक लोगों तक पहुँचने में मदद मिलती है।
इसका परिणाम न केवल बेहतर सेवाएं हैं, बल्कि उपयोगिता संचालन, नवीकरणीय ऊर्जा, बायोगैस, अपशिष्ट जल पुन: उपयोग और टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार भी सृजित होते हैं।
भविष्य के लिए एक रोडमैप: और यह क्यों महत्वपूर्ण है
तो, शहर वहां तक कैसे पहुंच सकते हैं? रिपोर्ट में चार व्यावहारिक बदलावों का उल्लेख किया गया है:
- महत्वपूर्ण वस्तुओें में निवेश करें - उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दें जिनसे सेवाओं में मापने योग्य सुधार हो सकें—जैसे रिसाव (leaks) को कम करना, सेवाओं का दायरा बढ़ाना या कचरा प्रबंधन (waste management) में सुधार करना।
- परिणामों को पुरस्कृत करें - ऐसे वित्तपोषण उपकरणों और प्रोत्साहनों का उपयोग करें जो शहरों और भागीदारों को केवल बुनियादी ढांचा खड़ा करने के बजाय बेहतर सेवा देने के लिए प्रोत्साहित करें।
- उच्च मानक स्थापित करें - सरकारी अनुदानों को स्पष्ट प्रतिबद्धताओं और मजबूत निगरानी से जोड़ें—ताकि सार्वजनिक धन से वास्तविक परिवर्तन हो सके।
- पेशेवर संस्थानों का निर्माण करें - जनता, प्रशिक्षण और प्रणालियों में निवेश करें ताकि शहरों में हर साल बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता और अनुशासन हो।
इस रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कि भारत के पास पहले से ही मूलभूत तत्व मौजूद हैं: राष्ट्रीय मिशन, प्रदर्शन-आधारित वित्तपोषण कार्यक्रम और शहर स्तर का व्यापक अनुभव। इन तत्वों को ऐसी प्रणालियों में जोड़ना है जो शहरों में लगातार परिणाम प्रदान कर सकें। इसमें चुनौतियाँ भी हैं और अवसर भी ।
शहरी आबादी में तेजी से वृद्धि के साथ, स्थिति और भी गंभीर हो गई है। विश्वसनीय जल, सुरक्षित स्वच्छता और कुशल अपशिष्ट प्रबंधन जीवन स्तर, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास के लिए मूलभूत हैं। जब ये सेवाएं सुचारू रूप से काम करती हैं, तो इनसे बीमारियां कम होती हैं, परिवारों का समय और पैसा बचता है, उद्योगों को सहयोग मिलता है और शहर स्वच्छ, हरित और अधिक उत्पादक बनते हैं।
जैसे-जैसे भारत विकसित भारत 2047 की परिकल्पना की ओर बढ़ रहा है, यह मार्ग परिणाम-केंद्रित, पेशेवर रूप से प्रबंधित शहरी सेवाओं से होकर गुजरता है। बुनियादी ढांचे ने नींव रख दी है। अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि पानी की हर बूंद, हर पाइप और हर ट्रीटमेंट प्लांट उन लोगों के लिए भरोसेमंद और उच्च गुणवत्ता वाली सेवा प्रदान करे जो प्रतिदिन इन पर निर्भर रहते हैं।
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